बाबा बैद्यनाथ मंदिर के गर्भगृह में 12 बजे से पहले रुद्राभिषेक पर रोक, नियम तोड़ने पर कार्रवाई

प्रशासन का कड़ा फैसला झारखंड के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या और मंदिर परिसर में सुचारू व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मंदिर प्रभारी सह एसडीओ रवि कुमार द्वारा जारी आदेश के अनुसार, अब मंदिर के गर्भगृह में दोपहर 12 बजे से पहले रुद्राभिषेक अनुष्ठान पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य आम श्रद्धालुओं को बिना किसी रुकावट के जलार्पण की सुविधा प्रदान करना है।

गर्भगृह में 12 बजे से पहले रुद्राभिषेक पर रोक एसडीओ रवि कुमार ने निर्देश दिया है कि गर्भगृह के भीतर निर्धारित समय सीमा (दोपहर 12 बजे) से पहले किसी भी प्रकार का रुद्राभिषेक नहीं किया जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई तीर्थ पुरोहित इस आदेश की अवहेलना करते पाए जाते हैं, तो उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह निर्णय मंदिर में आने वाले भक्तों की भारी भीड़ को प्रबंधित करने के लिए लिया गया है।
मंझलाखंड में संकल्प कराने पर भी लगी पाबंदी रुद्राभिषेक के साथ-साथ प्रशासन ने मंदिर के मंझलाखंड क्षेत्र में संकल्प और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों पर भी रोक लगा दी है। अधिकारियों के मुताबिक, मंझलाखंड में होने वाले इन अनुष्ठानों की वजह से भीड़ बेकाबू हो रही थी, जिससे कई बार भगदड़ जैसी स्थिति पैदा होने का खतरा बना रहता था। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और उन्हें सुगम दर्शन कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
दंडाधिकारी और थाना प्रभारी को जिम्मेदारी नियमों को सख्ती से लागू करने के लिए कंट्रोल रूम में तैनात दंडाधिकारियों और थाना प्रभारी को विशेष निर्देश दिए गए हैं। उन्हें आदेश दिया गया है कि वे नियमों का उल्लंघन करने वाले पुरोहितों की पहचान करें और तत्काल उचित कार्रवाई सुनिश्चित करें। प्रशासन ने इसे सुरक्षा और व्यवस्था की दृष्टि से एक अनिवार्य कदम बताया है।
पंडा धर्मरक्षिणी सभा का विरोध और धरना दूसरी ओर, मंदिर प्रबंधन के कुछ फैसलों के विरोध में पंडा धर्मरक्षिणी सभा ने गुरुवार को एकदिवसीय धरने का आयोजन किया है। सभा के महामंत्री निर्मल कुमार झा के नेतृत्व में यह प्रदर्शन सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक भीतरीखंड कार्यालय के निकट राधा-कृष्ण मंदिर के पास होगा। हालांकि, महामंत्री ने स्पष्ट किया है कि इस धरने का उद्देश्य मंदिर की अन्य व्यवस्थाओं से संबंधित है और इसका एसडीओ द्वारा जारी रुद्राभिषेक संबंधी आदेश से सीधा संबंध नहीं है।
