Categories

October 27, 2026

Suryoday Samvaad

Nayi Soch Nayi Disha

बिरसा हरित ग्राम योजना से बदली पश्चिम सिंहभूम के किसानों की तकदीर, आम की बागवानी से हो रही लाखों की कमाई

झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी ‘बिरसा हरित ग्राम योजना’ (Birsa Harit Gram Yojana) राज्य के ग्रामीण और आदिवासी इलाकों के विकास के लिए एक वरदान साबित हो रही है। पश्चिम सिंहभूम (West Singhbhum) जिले में इस योजना के जमीनी स्तर पर बेहद सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं। जिले के कई सुदूरवर्ती गांवों में जिन किसानों के पास कभी केवल बंजर या कम उपजाऊ जमीनें थीं, वे आज उन्नत तकनीक से आम की बागवानी (Mango Farming) कर सालाना लाखों रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं। इस योजना ने न सिर्फ किसानों को आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि ग्रामीण स्तर पर रोजगार के नए रास्ते भी खोल दिए हैं।

बंजर पड़ी जमीनों पर लहलहा रहे हैं फलों के बाग

पश्चिम सिंहभूम जिले के कई प्रखंडों में सिंचाई सुविधाओं की कमी और पथरीली मिट्टी के कारण पारंपरिक खेती करना काफी मुश्किल भरा काम था। बहुत से ग्रामीण रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर पलायन करने को मजबूर थे। लेकिन इस योजना के तहत जिला प्रशासन और मनरेगा (MGNREGA) के संयुक्त प्रयासों से किसानों को फलदार पौधे, जैविक खाद और तकनीकी प्रशिक्षण उपलब्ध कराया गया। किसानों ने अपनी अनुपयोगी पड़ी जमीनों पर मेहनत की और गड्ढे खोदकर (Pit Digging) आम के पौधे लगाए। आज वही बंजर खेत हरे-भरे बागों में तब्दील हो चुके हैं।

मिश्रित खेती और उन्नत किस्मों से बढ़ा मुनाफा

बागवानी के इस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि किसान आम के पेड़ों के बीच बची खाली जगह में अन्य नकदी फसलें और सब्जियां भी उगा रहे हैं। मिश्रित खेती (Intercropping) के इस तरीके से उन्हें सालभर नियमित आमदनी मिलती रहती है। इसके अलावा, योजना के तहत आम की बेहद लोकप्रिय और व्यावसायिक रूप से सफल किस्में जैसे अम्रपाली, मल्लिका और दशहरी के पौधे लगाए गए हैं। इन उन्नत किस्मों के फलों की बाजार में भारी मांग है, जिससे किसानों को स्थानीय स्तर के साथ-साथ बड़े शहरों की मंडियों में भी बहुत अच्छे दाम मिल रहे हैं।

स्थानीय स्तर पर थमा पलायन, आत्मनिर्भर बन रही हैं महिलाएं

इस योजना के व्यापक असर से जिले में होने वाले मानव पलायन (Migration) में काफी कमी आई है। अब ग्रामीणों को अपनी आजीविका के लिए घर-परिवार छोड़कर दूर नहीं जाना पड़ता। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं और महिला स्वयं सहायता समूह (SHGs) इस बागवानी अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं। पौधों की देखरेख से लेकर फलों की तुड़ाई और उनकी पैकेजिंग तक के काम में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है, जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त और स्वतंत्र हो रही हैं। प्रशासन का लक्ष्य आने वाले समय में जिले के अन्य ब्लॉकों में भी इस योजना का विस्तार करना है।

About Author

Leave a Reply