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October 27, 2026

Suryoday Samvaad

Nayi Soch Nayi Disha

JPSC-CGL रद्द मामला: झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई जारी, राज्य सरकार ने फैसले का बचाव करते हुए दिए मनी ट्रेल के सबूत

1. JPSC और JSSC CGL परीक्षा निरस्तीकरण पर अदालत में बहस जारी

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC 11वीं-13वीं), जेएसएससी सीजीएल 2023, सीडीपीओ और खाद्य सुरक्षा अधिकारी जैसी प्रमुख परीक्षाओं को रद्द किए जाने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर उच्च न्यायालय में निरंतर सुनवाई हो रही है। इस मामले में राज्य सरकार का पक्ष रखने के लिए सर्वोच्च न्यायालय की वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा उपस्थित हुईं। सुनवाई के दौरान सरकार ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि परीक्षाओं के संचालन में गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं। जांच में जुटी सीआईडी टीम को अब तक पैसों के अवैध लेन-देन (मनी ट्रेल) के पुख्ता प्रमाण मिले हैं, जिसके आधार पर पूरी प्रक्रिया को निरस्त करने का निर्णय लिया गया।

2. पूर्व में हुई सुनवाई में अदालत ने जताई थी कड़ी नाराजगी

इससे पूर्व न्यायमूर्ति दीपक रोशन की एकल पीठ में लंबी बहस दर्ज की गई थी। उस दौरान पीठ ने राज्य सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए पूछा था कि जब सीआईडी की जांच पूरी नहीं हुई है, तो इतनी जल्दबाजी में पूरी परीक्षा को रद्द क्यों किया गया? अदालत ने अंदेशा जताया था कि यह निर्णय संभवतः किसी बाहरी दबाव में लिया गया हो सकता है। इसके साथ ही पिछले ढाई वर्षों से लंबित जांच प्रक्रिया की सुस्त गति पर भी अदालत ने कड़ी आपत्ति जताई थी।

3. योग्य अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा और निष्पक्षता पर जोर

पिछली सुनवाई के दौरान पीठ ने रेखांकित किया था कि निष्पक्ष तरीके से चुने गए लगभग 2,500 मेधावी अभ्यर्थियों के अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए और उन्हें बिना किसी गलती के प्रताड़ित नहीं किया जा सकता। अदालत का मानना था कि व्यापक धांधली के सामान्य दावों के आधार पर सभी अभ्यर्थियों को अयोग्य ठहराना सही दृष्टिकोण नहीं है। केवल लिफाफा बंद रिपोर्ट के दम पर संपूर्ण विज्ञापन व परीक्षा को रद्द करने के कदम पर चिंता व्यक्त करते हुए अदालत ने आज पेश किए जा रहे नए तर्कों पर नजर बनाई हुई है।

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