JSSC CGL के माध्यम से हुई नियुक्ति रद्द करने के फैसले के विरोध में ASO का प्रोजेक्ट भवन के सामने प्रदर्शन

राज्य सरकार द्वारा JSSC CGL परीक्षा के माध्यम से की गई नियुक्तियों को निरस्त करने के निर्णय के खिलाफ नवनियुक्त सहायक प्रशाखा पदाधिकारियों (ASO) में गहरा असंतोष है। मंगलवार सुबह बड़ी संख्या में एएसओ अपनी ड्यूटी के लिए प्रोजेक्ट भवन सचिवालय पहुंचे, लेकिन वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें भीतर प्रवेश करने से रोक दिया।
पहले से कार्यरत एएसओ को भी अंदर जाने से रोका
सचिवालय परिसर में पहले से कार्यरत एएसओ को भी सुरक्षाकर्मियों ने मुख्य द्वार पर ही रोक दिया। इसके बाद नेपाल हाउस और एफएफपी बिल्डिंग समेत अन्य विभागों में तैनात एएसओ भी एकजुट होकर प्रोजेक्ट भवन पहुंचे और सरकार के निर्णय के विरुद्ध विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया। तेज बारिश के बावजूद सभी कर्मी शाम तक सचिवालय गेट के सामने डटे रहे और कई कर्मचारी सड़क पर ही बैठ गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस फैसले को स्वीकार नहीं करेंगे और न्याय पाने के लिए अदालत का रुख करेंगे।
जिनका दोष नहीं उन्हें क्यों सजा
प्रदर्शनकारी एएसओ का कहना था कि यदि परीक्षा या चयन प्रक्रिया के किसी स्तर पर कोई गड़बड़ी हुई है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। लेकिन जिन अभ्यर्थियों ने पूरी पारदर्शिता और अपनी योग्यता के बल पर सफलता हासिल की है, उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं किया जाना चाहिए। बिना किसी जांच या दोष सिद्ध हुए सामूहिक रूप से नियुक्ति रद्द करना न्यायसंगत नहीं है।
नौकरी रद्द नहीं हुई है बनायेंगे अटेंडेंस
विरोध जता रहे अधिकारियों का कहना था कि सरकार या विभाग की ओर से नियुक्ति रद्द किए जाने का कोई आधिकारिक पत्र या लिखित आदेश उन्हें अब तक प्राप्त नहीं हुआ है। प्रशासनिक स्तर पर लिखित सूचना न मिलने के कारण वे खुद को अब भी सेवा में मान रहे हैं। इसी आधार पर वे उपस्थिति दर्ज कराने के लिए परिसर के अंदर जाने का प्रयास करते रहे, हालांकि प्रशासन ने उन्हें अनुमति नहीं दी।
दूसरे विभागों में कोई रोक-टोक नहीं
कर्मियों ने सवाल उठाया कि अन्य विभागों के कामकाज सामान्य रूप से चल रहे हैं, लेकिन केवल JSSC CGL के तहत बहाल कर्मचारियों को ही निशाना बनाकर अंदर जाने से रोका जा रहा है। उनका तर्क था कि बिना किसी लिखित बर्खास्तगी आदेश के इस तरह रोकना प्रशासनिक नियमों के विपरीत है।
सुरक्षाकर्मियों से हुई नोक-झोंक
सचिवालय में प्रवेश करने की कोशिश के दौरान एएसओ और तैनात पुलिस-सुरक्षाकर्मियों के बीच तीखी नोक-झोंक भी देखने को मिली। कर्मियों ने कहा कि वे भी सरकार के ही प्रशासनिक अंग हैं, इसलिए उनके साथ अनुचित व्यवहार न किया जाए। इसके बाद सुरक्षा बलों ने लाउडस्पीकर के जरिए घोषणा करते हुए कर्मचारियों से शांति बनाए रखने और मुख्य मार्ग बाधित न करने की अपील की।
न करे पुलिस-प्रशासन
प्रदर्शन में शामिल एएसओ जन्मजय सिंह ने कहा कि कार्मिक विभाग द्वारा जारी आदेश और कोर्ट के निर्देशों के तहत उनकी बहाली हुई थी। जब तक कोई आधिकारिक नोटिस नहीं मिल जाता, वे खुद को सचिवालय का अधिकारी ही मानते हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारी पूरी तरह से लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रख रहे हैं, इसलिए पुलिस-प्रशासन को अनावश्यक टकराव की स्थिति उत्पन्न करने से बचना चाहिए।
सचिवालय के सामने लगातार चलेगा धरना
अपनी मांगों के समर्थन में नवनियुक्त सहायक प्रशाखा पदाधिकारियों ने प्रोजेक्ट भवन के बाहर टेंट लगाना शुरू कर दिया है। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक सरकार अपने फैसले पर पुनर्विचार नहीं करती, तब तक यह धरना अनवरत जारी रहेगा। इसकी औपचारिक सूचना संबंधित प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को दे दी गई है।
भीग कर भूखे-प्यासे सड़क पर खड़े रहे
दिनभर रुक-रुक कर हो रही बारिश के बीच रेनकोट और छातों का सहारा लेकर कर्मचारी सड़क पर टिके रहे। सुबह से शाम तक भूखे-प्यासे रहकर वे अपनी सेवा और भविष्य की रक्षा के लिए गुहार लगाते रहे। उन्होंने राज्य सरकार से अपील की कि इस संवेदनशील मुद्दे पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए निर्णय वापस लिया जाए।


