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November 4, 2026

Suryoday Samvaad

Nayi Soch Nayi Disha

कोच्चि का ज्यू टाउन फोर्ट सिखाता है विरासत को सहेजने का हुनर, झारखंड के लिए भी सीख

केरल के व्यापारिक केंद्र कहे जाने वाले एर्नाकुलम (कोच्चि) का फोर्ट कोच्चि इलाका केवल अपने व्यापारिक अतीत के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी जीवंत सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए भी पहचाना जाता है। फोर्ट कोच्चि स्थित ज्यू टाउन का संग्रहालय और पुरानी रिहायशी बस्तियां इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती हैं कि ऐतिहासिक धरोहरों को कैसे सुरक्षित रखकर उन्हें आने वाली पीढ़ियों और पर्यटन से जोड़ा जा सकता है।

ज्यू टाउन का संग्रहालय केवल पुरानी व दुर्लभ वस्तुओं का एक संग्रह मात्र नहीं है, बल्कि यह केरल की संस्कृति, समृद्ध परंपरा और अतीत के गौरव को बहुत ही प्रभावशाली ढंग से प्रदर्शित करता है। प्रसिद्ध सिनेगॉग के समीप स्थित इस संग्रहालय में पर्यटकों के प्रवेश हेतु ₹50 का शुल्क निर्धारित है।

कोच्चि का यह मॉडल झारखंड जैसे राज्य के लिए एक मार्गदर्शक का काम कर सकता है। झारखंड में शैल चित्र (Rock Paintings), गुफा कला, ऐतिहासिक पुरातात्विक अवशेष और समृद्ध आदिवासी संस्कृति की बहुमूल्य विरासत बिखरी हुई है। आवश्यकता इस बात की है कि इन धरोहरों को बेहतर ढंग से सहेजकर राज्य के पर्यटन मानचित्र पर प्रमुखता से स्थापित किया जाए।

संकरी गलियों में बसा है इतिहास

मट्टान्चेरी पैलेस और ऐतिहासिक सिनेगॉग के मध्य फैली तंग सड़कें पर्यटकों और एंटीक (प्राचीन शिल्प) प्रेमियों को विशेष रूप से अपनी ओर खींचती हैं। इन गलियों में लकड़ी की नक्काशी, धातुओं से बने हस्तशिल्प और पारंपरिक कलाकृतियों की कई दुकानें सजी हुई हैं।

यहाँ के पारंपरिक और पुराने ढांचों में पुर्तगाली, डच तथा इजराइली स्थापत्य कला का स्पष्ट प्रभाव देखने को मिलता है। इन गलियों से गुजरते हुए यहाँ की अनूठी वास्तुकला बीते जमाने के जीवनशैली की याद ताजा कर देती है।

यहाँ स्थित ‘इंडिया ट्रेड एंड स्पाइस एसोसिएशन’ की ऐतिहासिक इमारत इस तथ्य की पुष्टि करती है कि किसी दौर में कोच्चि विश्व व्यापार में मसालों का कितना प्रमुख केंद्र था। इसके अलावा, ज्यू टाउन में डच, पुर्तगाली और ब्रिटिश कालीन वास्तुकला का सुंदर समन्वय दिखाई देता है।

सिनेगॉग के रास्ते में स्थित ‘काशी’ नाम का हेरिटेज भवन भी काफी ध्यान आकर्षित करता है। इसके मुख्य द्वार की मेहराब पर सन 1761 अंकित है। यह पूरी बस्ती यह संदेश देती है कि आधुनिक विकास के बीच अपनी ऐतिहासिक पहचान को अक्षुण्ण रखना कितना आवश्यक है।

सिनेगॉग में इतिहास और आधुनिक तकनीक का संगम

सन 1568 में स्थापित ‘कोचीन प्रदेशी सिनेगॉग’ को राष्ट्रमंडल (Commonwealth) देशों की सबसे पुरानी सिनेगॉग माना जाता है। इसके भीतर प्रवेश करते ही रोमन और यहूदी स्थापत्य कला का अद्भुत संगम दिखाई देता है।

सिनेगॉग का आंतरिक भाग, छत से लटकते हुए मनमोहक रंग-बिरंगे झाड़-फानूस (लाइट्स) और प्रदर्शित धार्मिक ग्रंथ हर आगंतुक का ध्यान खींच लेते हैं।

इस संग्रहालय में इतिहास को सहेजने के लिए केवल पुरानी वस्तुओं पर ही निर्भरता नहीं रखी गई है, बल्कि आधुनिक डिस्प्ले, इंटरैक्टिव तकनीकों और सुंदर पेंटिंग्स का उपयोग किया गया है। तकनीक के इस समायोजन से युवा पीढ़ी के लिए इतिहास को समझना अत्यंत दिलचस्प और सुगम हो जाता है।

यहाँ 1805 ईस्वी में त्रावणकोर के तत्कालीन महाराजा द्वारा तोराह (धार्मिक ग्रंथ) के लिए उपहारस्वरूप भेंट किया गया स्वर्ण मुकुट (Gold Crown) प्रदर्शित किया गया है। साथ ही विंटेज मैकेनिकल घड़ियां, प्राचीन बड़े संदूक और यहूदी समुदाय की धार्मिक व सामाजिक जीवनशैली से जुड़ी अनेक वस्तुएं यहाँ संजोकर रखी गई हैं।

पेंटिंग्स में दर्ज है यहूदियों के भारत आने का इतिहास

ज्यू म्यूजियम की दीवारों पर लगी ऐतिहासिक चित्रकारियां अपने आप में एक जीवित दस्तावेज हैं। इन कलाकृतियों के माध्यम से यहूदी समुदाय के भारत आगमन और कोच्चि में उनके बसने की पूरी ऐतिहासिक यात्रा को चित्रित किया गया है।

इनमें से एक प्रमुख पेंटिंग में 70 ईस्वी के दौरान रोमनों द्वारा ‘दूसरे मंदिर’ के विनाश की घटना को दिखाया गया है, जिसके बाद यहूदियों ने नए आश्रय की तलाश में भारत का रुख किया था। चित्रकारी के माध्यम से कोच्चि के राजा द्वारा यहूदियों को दिए गए सम्मान, आश्रय और व्यापारिक अधिकारों को बखूबी दर्शाया गया है।

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