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November 1, 2026

Suryoday Samvaad

Nayi Soch Nayi Disha

जमशेदपुर में प्रकृति की पूजा सरहुल की धूम

जमशेदपुर में सरहुल की एक अलग उमंग । सड़को।पर सरहुल के गीत संगीत और ढोल नगाड़े। जहा आदिवासियो।के सांग शहर वासी भी झूमे। सरहुल पर्व को झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, बंगाल और मध्य भारत के विभिन्न आदिवासी क्षेत्रों में बेहद धूमधाम से मनाया जाता है. सरहुल की शुरूआत चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से होती है. यह वो समय होता है जब महुआ के फूल, पलाश के फूल, सरई के फूल आदि बसंत ऋतु के दौरान लहलहाने लगते हैं.

इसी खूबसूरत पल का जश्न मनाने के दौरान आदिवासियों का सरहुल पर्व इसमें चार चांद लगाता है. सरहुल मनाने के तरीकों में जगह-जगह पर थोड़ा बहुत बदलाव भी देखा जाता है. हांलाकि सभी जगह पूजा का महत्व एक होता है, जो कि प्राकृतिक महत्व से जुड़ा है.। वही जमशेदपुर में सराहुल प्रकृति की पूजा के साथ धूम मचाती हुए सीताराम डेरा क्षेत्र से सड़को पर दिखी जहा नाच गाना और सरहुल की बधाई देते दिखे आदिवासी समुदाय के लोग ।

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