नोवामुंडी के लखन साई-2 आंगनबाड़ी केंद्र की स्थिति बदहाल, टंकी-पंखे लगे पर पानी-बिजली गायब

झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के नोवामुंडी प्रखंड से एक चिंताजनक मामला सामने आया है। यहाँ के लखन साई-2 आंगनबाड़ी केंद्र का नया भवन बनने के बावजूद बच्चों को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। इस केंद्र को डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) फंड से तैयार किया गया है और बीते 6 अप्रैल से यहाँ कामकाज भी शुरू कर दिया गया था। लेकिन विडंबना यह है कि आज भी यह केंद्र पानी, बिजली और साफ-सुथरे माहौल जैसी बेहद आवश्यक बुनियादी सुविधाओं के गंभीर अभाव से जूझ रहा है।
टंकी लगी, लेकिन पानी की सुविधा नहीं
नए भवन की छत पर पानी के लिए सिंटेक्स की टंकी तो स्थापित कर दी गई है, लेकिन तकनीकी या प्रशासनिक लापरवाही के चलते उसमें अब तक जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। पानी न होने के कारण नन्हे बच्चों के लिए शौचालय का उपयोग करना और दैनिक जरूरतों को पूरा करना एक बड़ी मुसीबत बन गया है। स्थिति यह है कि केंद्र की सेविका और सहायिका को आज भी दूर-दराज के स्रोतों से पानी ढोकर लाना पड़ता है, जबकि नियमों के मुताबिक यह सुविधा परिसर के भीतर ही उपलब्ध होनी चाहिए थी।
पंखे और वायरिंग मौजूद, फिर भी बिजली का इंतजार
भवन के भीतर बिजली की पूरी वायरिंग कर दी गई है और कमरे में पंखे भी लटका दिए गए हैं, लेकिन मुख्य लाइन से बिजली का कनेक्शन अब तक नहीं जोड़ा गया है। नतीजा यह है कि इस झुलसाने वाली गर्मी और उमस के बीच मासूम बच्चे बिना पंखे के बैठने और पढ़ाई करने को मजबूर हैं। इसके अलावा, भवन निर्माण से जुड़ी पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि ठेकेदार या विभाग द्वारा यहाँ कोई सूचना पट्ट (इनफोर्मेशन बोर्ड) नहीं लगाया गया है, जिससे योजना की कुल लागत और अन्य विवरणों का पता चल सके। हैरानी की बात यह है कि इसी इलाके के लखन साई आंगनबाड़ी केंद्र संख्या-1 का हाल भी ऐसा ही है, जहाँ बिजली न होने से बच्चे परेशान हैं।
बाउंड्री वॉल का अभाव
केंद्र की सुरक्षा को लेकर भी स्थिति काफी नाजुक है। नवनिर्मित भवन की चहारदीवारी (बाउंड्री वॉल) नहीं बनाई गई है, जिससे यहाँ आने वाले छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर हमेशा खतरा बना रहता है। साथ ही, भवन परिसर के आस-पास हर तरफ गंदगी और कचरों का अंबार लगा हुआ है। इस डंपिंग ग्राउंड जैसे माहौल के कारण बच्चों के बीमार होने और संक्रमण फैलने की आशंका लगातार बढ़ती जा रही है।
इस पूरे मामले पर बाल विकास परियोजना की लेडी सुपरवाइजर (एलएस) सपानी माई कुदाद ने सफाई देते हुए कहा कि बिजली आपूर्ति के लिए संबंधित विभाग को आवेदन पत्र भेजा जा चुका है, मगर विभाग की ओर से कनेक्शन मिलने में देरी हो रही है।
स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल
इस बदहाली को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में काफी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि जब प्रखंड कार्यालय के बिल्कुल नजदीक स्थित आंगनबाड़ी केंद्र का यह हाल है, तो सुदूर ग्रामीण और जंगली क्षेत्रों में चल रहे केंद्रों की जमीनी हकीकत क्या होगी, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। ग्रामीणों के मुताबिक, एक तरफ सरकार बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और शुरुआती शिक्षा को लेकर बड़े-बड़े वादे करती है, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर प्रशासनिक उदासीनता इन दावों की पोल खोल रही है।


