झारखंड के पलामू में नल-जल योजना फेल, 6 साल बाद भी 29 गांवों तक नहीं पहुंचा पानी

पलामू में नल-जल योजना धड़ाम: 6 साल बाद भी 29 गांवों की प्यास नहीं बुझ सकी
झारखंड के पलामू जिले में सरकारी दावों के विपरीत ‘हर घर नल से जल’ योजना की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। पिछले 6 वर्षों से चल रही इस महत्वाकांक्षी परियोजना के बावजूद 29 गांवों के लोग आज भी बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी बुनियादी ढांचा अधूरा है, जिसके कारण ग्रामीणों को भीषण गर्मी में भी पुराने प्राकृतिक स्रोतों या मीलों दूर जाकर पानी लाने पर मजबूर होना पड़ रहा है।

अधूरा निर्माण और ठप पड़ी पाइपलाइन
इस परियोजना की विफलता का मुख्य कारण निर्माण कार्य में हो रही अत्यधिक देरी और तकनीकी खामियां हैं। कई गांवों में पाइपलाइन तो बिछा दी गई है, लेकिन उन्हें मुख्य जल स्रोत से नहीं जोड़ा गया है। वहीं, कुछ स्थानों पर जल मीनारें (Water Towers) सफेद हाथी बनकर खड़ी हैं क्योंकि उनमें पानी चढ़ाने के लिए बिजली या मोटर की व्यवस्था ही नहीं की गई है। अधिकारियों की उदासीनता और ठेकेदारों की लापरवाही ने इस पूरी योजना को अधर में लटका दिया है।
पानी के लिए मीलों का सफर तय करने को मजबूर ग्रामीण
योजना के सफल न होने का सबसे बड़ा खामियाजा महिलाओं और बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। प्यास बुझाने के लिए उन्हें रोजाना घंटों पैदल चलकर कुओं या नदियों तक जाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन ने कई बार आश्वासन दिया, लेकिन जमीनी हकीकत में कोई बदलाव नहीं आया। पानी की इस भारी किल्लत ने खेती-बाड़ी और पशुपालन को भी बुरी तरह प्रभावित किया है।
विभाग की चुप्पी और जवाबदेही पर सवाल
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की कार्यप्रणाली पर अब सवाल उठने लगे हैं। 6 साल का लंबा समय बीत जाने के बाद भी योजना का पूर्ण न होना विभागीय लापरवाही की ओर इशारा करता है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों व ठेकेदारों पर कार्रवाई की जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही जलापूर्ति शुरू नहीं हुई, तो वे सामूहिक रूप से विरोध प्रदर्शन करेंगे।
