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October 27, 2026

Suryoday Samvaad

Nayi Soch Nayi Disha

पहाड़ों और जंगलों के बीच सेवा की मिसाल बनीं सरायकेला-खरसावां की नर्सेज

झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के सुदूरवर्ती और पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की नर्सें अपनी कर्तव्यनिष्ठा की अनूठी मिसाल पेश कर रही हैं, जो दुर्गम रास्तों और पहाड़ियों की परवाह किए बिना मरीजों की सेवा में जुटी हैं।

कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में सेवा

जिले के कई गांव आज भी ऐसी जगहों पर स्थित हैं जहां पहुंचने के लिए पक्की सड़कें नहीं हैं। इन इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों, विशेषकर गर्भवती महिलाओं और बच्चों के टीकाकरण के लिए ये नर्सें कई किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचती हैं। बरसात के दिनों में जब पहाड़ी रास्ते और भी खतरनाक हो जाते हैं, तब भी इनका हौसला कम नहीं होता।

ग्रामीणों का अटूट विश्वास

इन नर्सों की मेहनत का ही नतीजा है कि अब सुदूर गांवों के लोग भी आधुनिक चिकित्सा पद्धति और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं पर भरोसा करने लगे हैं। ये न केवल दवाइयां और टीके पहुंचाती हैं, बल्कि ग्रामीणों को स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूक भी करती हैं। संस्थागत प्रसव (Institutional Delivery) को बढ़ावा देने में इनकी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही है।

सुविधाओं का अभाव, फिर भी बुलंद हौसले

संसाधनों की सीमित उपलब्धता और कठिन रास्तों के बावजूद, इन स्वास्थ्य कर्मियों का लक्ष्य केवल एक ही है— “कोई भी ग्रामीण इलाज से वंचित न रहे।” स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने भी इन कर्मठ नर्सों के कार्यों की सराहना की है, जो अपनी जान जोखिम में डालकर अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य लाभ पहुंचा रही हैं।

स्वास्थ्य विभाग का समर्थन

विभाग का कहना है कि इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य ढाँचे को और मजबूत करने के प्रयास जारी हैं। मोबाइल हेल्थ यूनिट और बेहतर कनेक्टिविटी के जरिए इन नर्सों के काम को सुगम बनाने की योजना पर काम किया जा रहा है ताकि भविष्य में स्वास्थ्य सेवाएं और भी सुचारू रूप से चल सकें।

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