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November 4, 2026

Suryoday Samvaad

Nayi Soch Nayi Disha

खरसावां पथ निरीक्षण भवन में बुधवार को चुआड़ विद्रोह के महानायक वीर शहीद रघुनाथ महतो का 245 वां शहादत दिवस मनाया गया

खरसावां पथ निरीक्षण भवन में बुधवार को चुआड़ विद्रोह के महानायक वीर शहीद रघुनाथ महतो का 245 वां शहादत दिवस मनाया गया। समाज के लोगों ने वीर शहीद रघुनाथ महतो के तस्वीर पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी। तथा 2 मिनट का मौन रखा गया। वही रघुनाथ महतो के जीवनी पर भी प्रकाश डाला गया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि शहीद रघुनाथ महतो भारत के पहले स्वतंत्रता सेनानी थे। ईस्ट इंडिया कंपनी ने जमीन की मालगुजारी लेनी शुरू की थी, तो 1769 में रघुनाथ महतो के नेतृत्व में चूहा विद्रोह शुरू किया गया था। अंग्रेज और उनके पिट्ठू जमींदारों ने घृणा प्रदर्शित करने के लिए इसका नामकरण चुहाड़ किया था। चुहाड़ का अर्थ लुटेरा अथवा उत्पाती होता है। यह विद्रोह 1769 से 1805 तक चला। कुड़मी समाज के लोगों द्वारा रघुनाथ महतो के नेतृत्व में सबसे पहला विरोध किया गया और ब्रिटिश शासकों के खिलाफ क्रांति का बिगुल फूंका गया। रघुनाथ महतो बचपन से ही देशभक्त व क्रांतिकारी स्वभाव के थे। चुहाड़ आंदोलन का फैलाव

नीमडीह,पातकुम,बड़ाभूम,धालभूम,मेदनीपुर,किंचुग परगना (वर्तमान सरायकेला खरसावां) राजनगर, गम्हरिया आदि तक हो गया था। उन्होंने अंग्रेजों के नाक में दम कर रखा था। मौके पर लोकनाथ महतो,धर्मेंद्र महतो,संतोष महतो,महावीर महतो, रामरतन महतो, सुशील महतो,ईश्वर चंद्र महतो, योगेश्वर महतो,लक्ष्मी महतो, चितरंजन महतो, महेश महतो, तिलक महतो,सुमित महतो,रईबु महतो,रमेश महतो,राजू महतो,बिपन महतो,छुटुराम महतो, रमाशंकर महतो,मकरू महतो,विशाल महतो,संतोष महतो समेत काफी संख्या में समाज के लोग उपस्थित थे।

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