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November 1, 2026

Suryoday Samvaad

Nayi Soch Nayi Disha

सरस्वती शिशु मंदिर उच्च विद्यालय में मनाई गई तुलसीदास जयंती

सरायकेला-खरसावां, 20 अगस्त 2026, गुरुवार (भाग्य सागर).

सरस्वती शिशु मंदिर उच्च विद्यालय, सरायकेला में तुलसीदास जयंती का कार्यक्रम श्रद्धा, उत्साह एवं गरिमापूर्ण वातावरण में किया गया।
विद्यार्थियों को गोस्वामी तुलसीदास जी के जीवन, साहित्य, आदर्शों एवं भारतीय संस्कृति के प्रति उनके योगदान से परिचित कराने के उद्देश्य से य़ह कार्यक्रम किया गया।

प्रधानाचार्य पार्थ सार्थी अचार्य द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम शुभारम्भ किया गया, इस अवसर पर दीदी शालिनी नंदा एवं कंचन वर्मा भी मंचासीन सदस्यों सहित उपस्थित रहीं।

दीदी, शालिनी नंदा दीदी ने गोस्वामी तुलसीदास जी के जीवन एवं उनके साहित्यिक योगदान पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को बताया कि तुलसीदास जी ने अपनी रचनाओं के माध्यम से भारतीय समाज को भक्ति, मर्यादा, सदाचार, सत्य, त्याग एवं मानवीय मूल्यों का संदेश दिया। उनकी अमर कृति रामचरितमानस ने भगवान श्रीराम के आदर्श चरित्र एवं भारतीय संस्कृति के मूल्यों को जन-जन तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इसके पश्चात विद्यालय के भैया-बहनों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए तुलसीदास जी द्वारा रचित दोहों, चौपाइयों एवं कविताओं का सुंदर पाठ प्रस्तुत किया। कुछ विद्यार्थियों ने तुलसीदास जी के जीवन एवं उनकी रचनाओं से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों पर अपने विचार भी व्यक्त किए।
इस दौरान तुलसीदास जी की प्रसिद्ध रचनाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि साहित्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि समाज के संस्कार, चरित्र निर्माण और नैतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है। वक्ताओं ने विद्यार्थियों को तुलसीदास जी के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने तथा भारतीय संस्कृति एवं साहित्य के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
प्रधानाचार्य पार्थ सार्थी अचार्य ने अपने संबोधन में तुलसीदास जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को स्मरण करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को अपनी गौरवशाली साहित्यिक एवं सांस्कृतिक परंपरा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को महान साहित्यकारों की रचनाओं का अध्ययन करने तथा उनके जीवन-मूल्यों को व्यवहार में उतारने के लिए प्रेरित किया।
पूरे कार्यक्रम के दौरान विद्यालय का वातावरण भक्ति, साहित्य एवं भारतीय संस्कृति की भावना से ओत-प्रोत रहा। विद्यार्थियों एवं आचार्य-दीदी की सहभागिता से कार्यक्रम अत्यंत सुंदर एवं ज्ञानवर्धक रहा।

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