बालू घाट बंद, फिर भी खूंटी की छाता नदी से रोज 100 हाइवा अवैध बालू पहुंच रहा रांची

रांची में नदी घाटों से बालू के खनन और उठाव पर पूरी तरह रोक होने के बावजूद प्रांतीय राजधानी में अवैध रेत की सप्लाई धड़ल्ले से जारी है। आरोप है कि खूंटी जिले के इलाकों से हर दिन भारी तादाद में भारी वाहनों (हाइवा) के जरिए बालू रांची लाया जा रहा है। इस अवैध सिंडिकेट और नेटवर्क के पीछे स्थानीय पुलिस महकमे की साठगांठ की खबरें भी जोरों पर हैं।
झारखंड की राजधानी रांची में इन दिनों रेत की कीमतें एक बार फिर आसमान छूने लगी हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और अदालती आदेशों के कारण फिलहाल सरकारी तौर पर बालू घाटों से खनन करने पर पूरी तरह पाबंदी लगी हुई है। इसी पाबंदी और किल्लत का सीधा फायदा अब बालू माफिया उठा रहे हैं। रात के अंधेरे में नदियों से अवैध रूप से रेत निकालने और उसे चोरी-छिपे हाइवा ट्रकों में लोड कर ठिकाने लगाने का खेल धड़ल्ले से चल रहा है।
खूंटी से निकलने वाली यह अवैध रेत कर्रा, सिरका, हजाम, तुपुदाना, धुर्वा और जगन्नाथपुर के रास्तों से होते हुए रोजाना रांची पहुंच रही है। अनुमान के मुताबिक, हर दिन लगभग 100 हाइवा अवैध बालू रांची की सीमाओं में प्रवेश कर रहा है। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि यह पूरा खेल पुलिस प्रशासन की कथित तौर पर मूक सहमति और मिलीभगत से चल रहा है। खूंटी से कर्रा, सिरका और हजाम होते हुए तुपुदाना पहुंचने वाला यह मार्ग बेहद सुनसान रहता है। रात 9 बजे के बाद इस रूट पर आम गाड़ियों की आवाजाही लगभग बंद हो जाती है और पुलिस की गश्ती गाड़ियां भी नदारद रहती हैं। इसी सूनेपन का फायदा उठाकर माफिया बिना किसी डर या रोक-टोक के हर दिन लाखों रुपए की अवैध रेत रांची के बाजारों में खपा रहे हैं।
एक हाइवा बालू के लिए थाने को मिल रहा है पांच हजार रुपए महीने के चढ़ावा
सिंडिकेट से जुड़े सूत्रों की मानें तो इस अवैध धंधे को बेरोकटोक चलाने के लिए थानों के स्तर पर मोटी रकम बांटी जा रही है। एक हाइवा गाड़ी को सुरक्षित पार कराने के बदले संबंधित थानों को प्रति माह लगभग पांच हजार रुपए का कथित ‘चढ़ावा’ दिया जा रहा है। खूंटी से रांची की दूरी तय करने के दौरान गाड़ियों को कर्रा, तुपुदाना, धुर्वा और जगन्नाथपुर जैसे पुलिस थानों के क्षेत्रों से गुजरना पड़ता है।
इस रूट पर हर दिन 100 के करीब हाइवा दौड़ रहे हैं। बताया जाता है कि जो भी वाहन मालिक या माफिया तय रकम नहीं पहुंचाते, पुलिस केवल उन्हीं की गाड़ियों को पकड़कर कार्रवाई का दिखावा करती है। इसके उलट, जिन सिंडिकेट संचालकों का हिसाब-किताब पहले से तय रहता है, उनकी गाड़ियों को कहीं भी रोका या टोका नहीं जाता। इन थानों की कथित ‘सेटिंग’ के बूते ही बालू माफिया बिना किसी सरकारी डर के अवैध रेत रांची पहुंचा रहे हैं।
समझिए रेत का खेल
इस अवैध कारोबार के आर्थिक गणित को इन आंकड़ों के जरिए आसानी से समझा जा सकता है:
- एक थाने को प्रति हाइवा अवैध भुगतान: ₹5,000 प्रति माह
- रूट पर रोजाना चलने वाली गाड़ियां: 100 हाइवा
- प्रति माह एक थाने का कथित कलेक्शन: ₹5 लाख
- मुख्य रूट (कर्रा और तुपुदाना) का अनुमानित मासिक कलेक्शन: ₹10 लाख
- रांची पहुंचने पर एक हाइवा बालू की मौजूदा बाजार कीमत: ₹32,000
- रोजाना रांची पहुंचने वाला 100 हाइवा बालू: 100 × 32,000 = ₹32 लाख प्रतिदिन का अवैध कारोबार
रास्ता में सिर्फ जंगल इसलिए लाया जा रहा है अवैध बालू
खूंटी की छाता नदी से बड़े पैमाने पर अवैध रेत निकालकर उसे कर्रा के रास्ते रांची लाने की एक मुख्य वजह इस रूट की भौगोलिक स्थिति भी है। यह पूरा मार्ग घने जंगलों से घिरा हुआ है और यहां आम लोगों या सामान्य वाहनों का आना-जाना बहुत कम होता है। रात के वक्त इस पूरे सुनसान रास्ते पर सिर्फ और सिर्फ अवैध बालू से लदे हाइवा ट्रक ही तेज रफ्तार में दौड़ते नजर आते हैं, जिससे माफियाओं को आसानी से सुरक्षित रास्ता मिल जाता है।
