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October 27, 2026

Suryoday Samvaad

Nayi Soch Nayi Disha

झारखण्ड : बिजली टैरिफ बढ़ोतरी से उपभोक्ताओं पर पड़ेगी अतिरिक्त वित्तीय बोझ…

Ranchi : हाल फिलहाल विधानसभा चुनाव संपन्न हुआ और सरकार भी बनी। चुनाव प्रचार के दौरान प्रार्थियों को शक्ति दिलाने के लिए आम जनों के समक्ष नेताओं की मुंह से वादों की झड़ी लगा हुआ था। और उन सभी मे से जिनके एजेंडे से जनता आकर्षित हुआ आज उनके ही हाथों में राज्य की बागडोर सौंप दिया। लेकिन अब बिजली टैरिफ की बढ़ोतरी पर शायद सभी एकबार सोचने को विवश हो जाएंगे। वहीं झारखंड में बिजली दरों में बढ़ोतरी को लेकर झारखंड विद्युत नियामक आयोग ने राज्य में बिजली टैरिफ 6.65 रुपये प्रति यूनिट से बढ़ाकर 8.65 रुपये प्रति यूनिट करने का प्रस्ताव पेश किया है। यह प्रस्ताव झारखंड विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) द्वारा प्रस्तुत किया गया है, और अगर यह लागू होता है, तो उपभोक्ताओं को अपनी बिजली की खपत पर अधिक राशि चुकानी पड़ेगी।

जानें बिजली टैरिफ बढ़ाने की वजह…..

इस संवंध में सूत्रों ने बताया कि JBVNL के अधिकारियों का कहना है कि बिजली के उत्पादन और वितरण की लागत बढ़ने के कारण यह कदम उठाना अब बेहद जरूरी है। जहाँ कोयले, गैस और अन्य संसाधनों की कीमतों में वृद्धि के साथ-साथ बिजली उत्पादन के लिए की जाने वाली अन्य जरूरी चीजों की लागत भी बढ़ गई है। इसके अलावा, वितरण नेटवर्क की मरम्मत और आधुनिकीकरण के लिए भी अधिक खर्च हो रहा है। अब यह अतिरिक्त लागत को ध्यान में रखते हुए बिजली टैरिफ बढ़ाने की प्रस्ताव पेश किया गया है।

 इधर बताया जा रहा है कि अगर यह टैरिफ बढ़ोतरी पर आयोग के मुहर लगती है तो निश्चित है कि गरीब एवं मध्यम वर्ग के परिवार पर अधिक आर्थिक बोझ बढ़ जाएगी।

सरकार का सफाया….

इस मामले पर झारखंड सरकार ने कहा है कि वह इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करेगी, लेकिन उपभोक्ताओं पर न्यूनतम असर डालने की कोशिश की जाएगी। साथ ही बिजली सेवा दुरुस्त करने के लिए यह कदम उठाना भी जरूरी है। लेकिन इस पर निर्णय लेते समय उपभोक्ताओं की चिंताओं को भी ध्यान रखा जाएगा।

बता दें की राज्य में गरीब और मध्यम वर्ग के उपभोक्ताओं के लिए सरकार सब्सिडी दे सकती है। राज्य में बिजली टैरिफ की प्रस्तावित बढ़ोतरी से राज्य की उपभोक्ताओं पर अधिक आर्थिक बोझ बढ़ सकती है। हालांकि सरकार और निगमों दोनों कह रहे है कि टैरिफ की बढ़ोतरी को वित्तीय मजबूरी है। 

अब राज्यवासियों को यह देखना होगा कि झारखंड विद्युत नियामक आयोग इस प्रस्ताव को मंजूरी देता है या नहीं, और यदि मंजूरी मिलती भी है तो उपभोक्ताओं के लिए राहत के उपाय क्या हो सकता है।

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